Guidelines Governing
Adoption of Children, 2015




Women Welfare Scheme/Program

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)-

* माह फरवरी, 2008-09 से राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) योजना आच्छादित।
* वित्तीय वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम योजनान्तर्गत 692543 लाभार्थी आच्छादित।
* पेंशन की धनराशि को प्रतिमाह रू0 500/- से बढाकर 1000/- किये जाने की स्थिति में वित्तीय वर्ष 2016-17 के वर्तमान लाभार्थी संख्या-1731878 के अनुसार कुल रू0 20,78,25,36,000=00 (रू0 बीस अरब अठहत्तर करोड पच्चीस लाख छत्तीस हजार मात्र) का व्यय सम्भावित।


पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना-

* पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना वर्ष 1995 में समाज कल्याण विभाग से महिला कल्याण विभाग को हस्तान्तरित/लागू।
* पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला योजनान्तर्गत प्रति लाभार्थी रू0 500/- प्रतिमाह।
* योजना का लाभ ऐसी निराश्रित महिला जिसके पति की मृत्यु हो गयी हो और जिनके बच्चे नाबालिग हैं अथवा बालिग होने के बावजूद भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, गरीबी की रेखा से निवासरत महिला योजना की पात्रता से आच्छादित है।
* गरीबी की रेखा के नीचे ग्रामीण क्षेत्र में निर्धारित आय रू0 19884/- एंव शहरी क्षेत्र में रू0 25546/- की वृद्धि करते हुए शासनादेश संख्या-1683/60-1-15-1/03(17)15 दिनांक 15 अक्टूबर, 2015 द्वारा इस सीमा को बढाते हुए योजनान्तर्गत 05 व्यक्तियों के परिवार हेतु ग्रामीण क्षेत्र में रू0 46080/- एंव शहरी क्षेत्र में रू0 56460/- निर्धारित ।
* शासनादेश संख्या-3022 दिनांक 02 जनवरी, 2014 के द्वारा निर्धारित लक्ष्य-2349898
* वित्तीय वर्ष 2014-15 के द्वितीय छमाही से योजना पी0एफ0एम0एस0 (PFMS) व्यवस्था के माध्यम से लागू ।
* वित्तीय वर्ष 2015-16 में लाभन्वित लाभार्थियों की संख्या-1728472
* वित्तीय वर्ष 2016-17 की तृतीय छमाही में लाभान्वित लाभार्थियों की संख्या-1731878
* शासनादेश संख्या-504 दिनांक 09.03.2017 द्वारा चतुर्थ छमाही में धनराशि की व्यवस्था न होे पाने के कारण 414985 लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2016-17 में तथा अवशेष लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2017-18 के अप्रैल माह में पेंशन भुगतान किये जाने का निर्णय।
* शासनादेश संख्या-2491/60-1-16-1/13(4)/16 दिनांक 28-9-2016 के अन्तर्गत पेंशन की धनराशि रू0 300/- से बढाकर रू0 500/- किये जाने के फलस्वरूप तृतीय किस्त का भुगतान रू0 500/- प्रति लाभार्थी प्रतिमाह की दर से किये जाने के कारण योजनान्तर्गत धनराशि कम उपलब्ध।


पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिलाओं से पुनर्विवाह करने पर दम्पत्ति को पुरस्कार-

* पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला से पुनर्विवाह करने पर दम्पत्ति को पुरस्कार योजना के अन्तर्गत निराश्रित महिलायें जिनके पति की मृत्यु हो गयी हो, से पुनर्विवाह करने पर दम्पत्ति को पुरस्कृत किये जाने की योजना संचालित है, बशर्ते की वह आयकर दाता न हो । दम्पत्ति को विवाह से एक वर्ष के अन्दर अनुदान प्राप्त करने हेतु प्रार्थनापत्र जिला परिवीक्षा अधिकारी के कार्यालय में जमा करना होता है एंव जिलाधिकारी की स्वीकृति के उपरान्त दम्पत्ति को रू0 11000/- का पुरस्कार दिया जाता है।
* वित्तीय वर्ष 2016-17 में रू0 45.00 लाख के प्राविधान के सापेक्ष रू0 44.99 लाख का आवंटन 409/- लाभार्थियों हेतु किया गया।


पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिलाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान-

* पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु एकमुश्त रू0 10000/- की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
* वित्तीय वर्ष 2016-17 में रू0 70.00 लाख के प्राविधान के सापेक्ष 700/- लाभार्थियों को धनराशि आवंटित की गयी।
नोट: दहेज से पीडित महिलाओं को कानूनी सहायता योजना में रू0 125/- प्रतिमाह , दहेज से पीडित महिलाओं को आर्थिक सहायता योजना रू0 2500/- प्रतिमाह, निराश्रित महिला की पुत्री से विवाह योजनान्तर्गत रू0 10000/- तथा पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला से विवाह करने पर दम्पत्ति को पुरस्कार रू0 11000/- को बढाये जाने का नीतिगत प्रकरण अपेक्षित।


दहेज से पीडित महिलाओं को आर्थिक सहायता-

* दहेज से पीडित ऐसी महिला जो राजकीय संस्था की संवासिनी न हो किसी अन्य विभाग से सहायता प्राप्त न कर रही हो, थाने में उत्पीडन की प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हो अथवा न्यायालय में जिनका वाद विचाराधीन हो तथा गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही हो, को जिला परिवीक्षा अधिकारी, जो जिला दहेज प्रतिषेध अधिकारी भी नामित हैं, के कार्यालय में सहायता प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र देना हाता है। जिलाधिकारी की स्वीकृति के उपरान्त पात्र उत्पीडित महिला को रू0 125/- प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
* वित्तीय वर्ष 2016-17 में रू0 9.00 लाख के प्राविधान के सापेक्ष 600/- लाभार्थियों हेतु धनराशि आवंटित की गयी।


दहेज से पीडित महिलाओं को कानूनी सहायता-

* दहेज से पीडित ऐसी परित्यक्त महिलाओं को, जिन्हें अन्य विभाग द्वारा सहायता प्राप्त न हो रही हो, अपने भरण-पोषण हेतु आय का कोई श्रोत न हो तथा गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही हो, को जिला परिवीक्षा अधिकारी, जो जिला प्रतिषेध अधिकारी भी नामित हैं, के कार्यालय में सहायता हेतु आवेदन पत्र देना होता है एंव जिलाधिकारी की स्वीकृति के उपरान्त ऐसी उत्पीडित महिला को मुकदमें की पैरवी हेतु रू0 2500/- की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है।
* वित्तीय वर्ष 2016-17 में रू0 8.00 लाख के प्राविधान के सापेक्ष 320/- लाभार्थियों हेतु धनराशि आवंटित की गयी।


स्वाधार योजना-

वर्तमान में प्रदेश में 38 संस्थायें संचालित है तथा इन गृहों में घरेलू हिंसा से पीड़ित, निराश्रित, परित्यक्त, पूर्व महिला बंदी, दैवीय आपदा से पीड़ित आदि महिलाओं को गृह में रखे जाने की व्यवस्था है। गृह में महिलाओं एंव उनके बच्चों को भोजन, वस्त्र, बिस्तर, चिकित्सा सुविधा तथा वोकेशनल टेªनिंग की व्यवस्था है। नवीन गाइड लाइन के अनुसार स्वैच्छिक संगठनों को 60 केन्द्रांश एंव 40 राज्यांश के अनुपात में धनराशि दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। जिसके क्रम में वित्तीय वर्ष 2016-17 में भारत सरकार द्वारा केन्द्रांश की 50 प्रतिशत धनराशि के रूप में शासनादेश संख्या-जी-1-97/60-3-17-65(सा)/ दिनांक 03 जनवरी 2017 द्वारा कुल रू0-3,14,06,400-00 की अवमुक्त की गयी है। उक्त क्रम में अर्हता पूर्ण करने वाले स्वैच्छिक संगठनांे को धनराशि आवंटित किये जाने की कार्यवाही की जा रही है।


स्टेप योजना-

भारत सरकार की वित्त पोषित स्टेप योजना है। जो कि स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से संचालित की जाती है। राज्य की संस्तुति के आधार पर महिला एंव बाल बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा स्वैच्छिक संगठनों को सीधे धनराशि मुक्त की जाती है। इस योजना में शहरी एंव ग्रामीण क्षेत्र की गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही महिलाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम दिया जाता है ताकि आर्थिक एंव सामाजिक रूप से ऐसी महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ की जा सके।



उज्जवला योजना-

भारत सरकार की वित्त पोषित उज्जवला योजना के अन्तर्गत ट्रैफिकिंग से पीड़ित महिलाओं एंव बालिकाओं का बचाव तथा उन्हें समाज की मुख्य धारा से पुनः जोड़ने के लिये स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से संचालित गृह में रखा जाता है। गृह में महिलाओं एंव बालिकाओं को भोजन, वस्त्र, बिस्तर, चिकित्सा सुविधा तथा वोकेशनल टेªनिंग की व्यवस्था है।


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ-

भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना वर्तमान में 17 जनपद यथा इलाहाबाद, आगरा, बागपत, बरेली, बुलन्दशहर, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, हाथरस, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, वाराणसी में महिला कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजनान्तर्गत कुल रू0-617.7172 लाख की धनराशि भारत सरकार से प्राप्त हुयी थी जिसके सापेक्ष उक्त योजना के संचालन हेतु महिला समाख्या को कुल रू0-316.53465 धनराशि अवमुक्त की गयी है। वर्तमान में यह योजना महिला कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित नहीं हो रही है बल्कि सीधे केन्द्र सरकार द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से संचालित की जा रही है।


महिला हेल्पलाइन-

महिलाओं को हिंसा से संरक्षण, चिकित्सा सुविधा, विधिक सहायता, आश्रय प्रदान करना तथा पीड़ित महिलाओं एंव बालिकाओं पुर्नवासन संबधी योजना से लाभान्वित किये जाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा स्कीम फॅार यूनिवर्सलाइजेशन आॅफ वुमेन हेल्पलाइन 181 की स्थापना की गयी है। इसके अन्तर्गत वित्तीय 2016-17 में 108.13 लाख की धनराशि का प्राविधान किया गया है। उक्त धनराशि ई.वी.जी.वी.के.ई.एम. आवंटित कर दिया गया है।


आपकी सखी- रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति केन्द्र-

आपकी सखी- रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति केन्दों के माध्यम से महिलाआंे से सम्बन्धित विभिन्न बहुआयामी सुविधायें एक ही छत के नीचे यथा महिला पुलिस रिपोर्टिंग चैकी , चिकित्सा सहायता सेल , 181 महिला हेल्पलाइन एवं रेस्क्यू वैन सेवायें जी0वी0के0-ई0एम0आर0 आई0 द्वारा , क्राइसिस इन्टरवेन्शन सेन्टर की सेवायें , परामर्ष /ट्रामा काउन्सिलिंग, कौशल विकास/महिला आर्थिक स्वावलम्बन, आउटरीच रेस्क्यू आपरेशन, चिकित्सीय सेवा , एफ0आई0आर0 , विधिक सहायता ( डी0 एल0 एस0 ए0), की सेवायें प्राप्त की जा रहीं हैं। हिंसा से पीड़ित महिला के लिए ही नहीं बल्कि कोई भी महिला इस केन्द्र से सुविधा प्राप्त कर सकती है। 11 जनपदों यथा जनपद आगरा, बरेली, इलाहाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, वाराणसी, कानपुर नगर, कन्नौज, लखनऊ, गोरखपुर, गाजीपुर के मेडिकल कालेज/जिला चिकित्सालय के परिसर में ही स्थापित किया गया है। पीलीभीत, झांसी, मुजफ्फरनगर, मिर्जापुर, शाहजहापुर, बांदा में प्रक्रियाधीन। प्रदेश के अवशेष सभी जनपदों में प्रस्तावित।


रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष की स्थापना-

* रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष नियमावली-2015 के अन्तर्गत कोष की स्थापना।
* उक्त कोष को दिनांक 04.01.2017 से किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 105 के अंतर्गत किशोर न्याय निधि के रूप में निर्दिष्ट करते हुए ’’उ0प्र0 रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष’’ के रूप में संशोधित किया गया है।
* कोष के तहत आई0पी0सी0 की धारा 326 क (एसिड अटैक), 304 ख, दहेज हत्या, 376 क, बलात्कार परिणामस्वरूप मृत्यु/निष्क्रिय अवस्था), 376 ग (कस्टोडियल रेप), 376 घ (गैंगरेप), तथा पाक्सो की धारा-4, 6, 14 तथा धारा-302 के साथ पठित पाक्सो की धारा 4/6 आदि के संबंध में पीड़िता को रू0 03.00 लाख से लेकर 10.00 लाख की सहायता।
* कोष के तहत दिनांक 27.03.2017 तक कुल 1257 महिलाओं/बालिकाओं/बालकों को आर्थिक/चिकित्सीय/शैक्षिक सहायता उपलब्ध करायी गयी है।
* कोष द्वारा प्रदेश के कुल 6 मेडिकल कालेजों में बर्न एवं री कन्स्ट्रक्टिव सर्जरी यूनिट की स्थापना की जा रही है।
* कोष हेतु वित्तीय वर्ष 2016-17 में रू0 100.00 करोड़ का प्राविधान।
* कोष के कम्प्यूटरीकृत संचालन हेतु वेब पोर्टल- mahilakalyan.up.nic.in/msk, एएन0 आई0 सी0 के माध्यम से तैयार किया गया है।
* पोर्टल द्वारा धनराशि पी0एफ0एम0एस0 पद्धति से लाभार्थी को सीधे अंतरित की जाती है।


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ-

भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना वर्तमान में 17 जनपद यथा इलाहाबाद, आगरा, बागपत, बरेली, बुलन्दशहर, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, हाथरस, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, वाराणसी में महिला कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित है। शनैः शनैः उ0प्र0 के अवशेष जनपदों में भी संचालित किया जाना प्रस्तावित है। पी0एन0डी0टी0 एक्ट के क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जाना है।


181 महिला हेल्पलाइन-

महिलाओं को हिंसा से संरक्षण, चिकित्सा सुविधा, विधिक सहायता, आश्रय प्रदान करना तथा पीड़ित महिलाओं एंव बालिकाओं पुर्नवासन संबधी योजना से लाभान्वित किये जाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा स्कीम फॅार यूनिवर्सलाइजेशन आफ वुमेन हेल्पलाइन 181 की स्थापना की गयी है।


महिला समाख्या कार्यक्रम-

* महिला समाख्या कार्यक्रम की शुरूआत 1989 में केन्द्र वित्त पोषित योजना के रूप में हुयी।
* महिला समाख्या के समस्त कार्यकर्ता जेन्डर मुद्दों पर महिला हिंसा, घरेलू हिंसा आदि हेतु प्रशिक्षित।
* महिला समाख्या कार्यक्रम को दिनांक 09.01.2017 द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग से महिला कल्याण विभाग में राज्य वित्त पोषित योजना के रूप में अंगीकृत किया गया है।
* वर्तमान में संचालन : जिला 19 , ब्लाक 78 (भविष्य में उ0प्र0 के अवशेष जनपदों में भी संचालित किया जाना प्रस्तावित है।)

कार्यक्रम के तहत स्थापित महत्वपूर्ण ढांचे :-

* नारी अदालत -36, जनपद -16, मुद्दे सुलझाए -4774 (घरेलू हिंसा एवं अन्य प्रकार की हिंसा)
* नारी संजीवनी केन्द्र: 59, जनपद -16, कुल मरीजों का परम्परागत तरीकों से इलाजः 26946
* बचत संघ: 1519, सदस्य संख्या- 4535, , कुल धनराशि- रू0 1,07 करोड़ , (सामूहिक खेती, तालाब व जमीन का पट्टा, अन्न भण्डारण, टैन्ट हाऊस, बिसात खाना, स्टेशनरी बनाना, पशु पालन व अपनी जरूरतों के आधार पर आपसी लेन-देन करना।, 504 समूहों द्वारा मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन)
* महिला शिक्षण सशक्तीकरण केन्द्र -16 , जनपदः 16, लगभग 10000 महिलाएं व किशोरियां जागरूक, जानकार व साक्षर हुई हैं।
* महासंघ: 52, जनपद- 16, इनके द्वारा महिला समाख्या की विचारधारा व सिद्धान्तों के आधार पर सामुदायिक स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, जेण्डर, कानून, आदि मुद्दों पर जागरूकता अभियान व गतिविधियांें का संचालन
* महिला समाख्या द्वारा 34 जनपदों में पानी पंचायत का गठन
* 3085 ग्राम पंचायतों में महिला एवं बाल अधिकार मंच का सुदृढ़ीकरण व सक्रियता।
* 33 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का संचालन
* 24 विहान बालक/बालिका आवासीय विद्यालय ( सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड )
* 17 जनपदों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का संचालन लगभग 2,5 लाख लोगों तक पहुंच बना


राजकीय जिला महिला शरणालय-

महिला कल्याण विभाग के अन्तर्गत राजकीय महिला शरणालय, संरक्षण गृह, सुधार गृह एंव राजकीय मानसिक रूप से अविकसित महिलाओं का प्रकोष्ठ का संचालन किया जा रहा है। जिसमे भारतीय दंण्ड़ संहिता में वांछित साक्ष्य हेतु प्रस्तुत की जाने वाली पीड़ित महिलाओं एंव घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं एंव जरूरत मन्द भटकी हुई नैतिक संकट से ग्रसित महिलाओं को संरक्षण/आश्रय प्रदान किया जाता है। प्रदेश में कुल 12 जनपदों वाराणसी, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर नगर, मथुरा, इटावा, फैजाबाद, लखनऊ, बरेली में किया जा रहा है, इन गृहों की कुल स्वीकृत क्षमता 725 की है जिसके सापेक्ष 588 महिलायें वर्तमान में निवासरत है। इन गृहों में सक्षम न्यायालय द्वारा भेजी गयी महिलाओं को निःशुल्क भोजन, वस्त्र, रहने आदि की व्यवस्था शासन द्वारा की गयी है।







Website Developed and Copyrights Reserved By Think Computers